सूरह आल-इमरान
وَلَا تَحْسَبَنَّ ٱلَّذِينَ قُتِلُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ أَمْوَٰتًۢا ۚ بَلْ أَحْيَآءٌ عِندَ رَبِّهِمْ يُرْزَقُونَ
Wa lā taḥsabannal-lażīna qutilū fī sabīlillāhi amwātā(n), bal aḥyā'un 'inda rabbihim yurzaqūn(a).
तुम उन लोगों को जो अल्लाह के मार्ग में मारे गए है, मुर्दा न समझो, बल्कि वे अपने रब के पास जीवित हैं, रोज़ी पा रहे हैं
📝 टिप्पणी
134) इसका अर्थ यह है कि वे किसी अन्य लोक (परलोक/आलम-ए-बर्ज़ख़) में जीवित हैं, न कि इस भौतिक संसार में। वे अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) के पास विभिन्न प्रकार की सुख-सुविधाएँ और अनुग्रह प्राप्त कर रहे हैं। उस दूसरे लोक के जीवन की वास्तविक स्थिति को केवल अल्लाह ही जानता है।