सूरह आल-इमरान
هَـٰٓأَنتُمْ هَـٰٓؤُلَآءِ حَـٰجَجْتُمْ فِيمَا لَكُم بِهِۦ عِلْمٌ فَلِمَ تُحَآجُّونَ فِيمَا لَيْسَ لَكُم بِهِۦ عِلْمٌ ۚ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
Hā antum hā'ulā'i ḥājajtum fīmā lakum bihī ‘ilmun falima tuḥājjūna fīmā laisa lakum bihī ‘ilm(un), wallāhu ya‘lamu wa antum lā ta‘lamūn(a).
"ये तुम लोग हो कि उसके विषय में वाद-विवाद कर चुके जिसका तुम्हें कुछ ज्ञान था। अब उसके विषय में क्यों वाद-विवाद करते हो, जिसके विषय में तुम्हें कुछ भी ज्ञान नहीं? अल्लाह जानता है, तुम नहीं जानते"
📝 टिप्पणी
96) अहले किताब जिन बातों को जानते थे, वे नबी मूसा, नबी ईसा और नबी मुहम्मद ﷺ से संबंधित थीं। 97) और जिस बात को अहले किताब नहीं जानते थे, वह नबी इब्राहीम अलैहिस्सलाम से संबंधित थी।