सूरह आल-इमरान

فَإِن كَذَّبُوكَ فَقَدْ كُذِّبَ رُسُلٌ مِّن قَبْلِكَ جَآءُو بِٱلْبَيِّنَـٰتِ وَٱلزُّبُرِ وَٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُنِيرِ

Fa in każżabūka faqad kużżiba rusulum min qablika jā'ū bil-bayyināti waz-zuburi wal-kitābil-munīr(i).

फिर यदि वे तुम्हें झुठलाते ही रहें, तो तुमसे पहले भी कितने ही रसूल झुठलाए जा चुके है, जो खुली निशानियाँ, 'ज़बूरें' और प्रकाशमान किताब लेकर आए थे

📝 टिप्पणी
142) ज़ुबुर से तात्पर्य पवित्र वाणी के पत्रों या पन्नों (सहीफ़ों) से है, जैसे नबी इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) और नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) के सहीफ़े।

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