सूरह आल-इमरान
وَمَا مُحَمَّدٌ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ ٱلرُّسُلُ ۚ أَفَإِي۟ن مَّاتَ أَوْ قُتِلَ ٱنقَلَبْتُمْ عَلَىٰٓ أَعْقَـٰبِكُمْ ۚ وَمَن يَنقَلِبْ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ فَلَن يَضُرَّ ٱللَّهَ شَيْـًٔا ۗ وَسَيَجْزِى ٱللَّهُ ٱلشَّـٰكِرِينَ
Wa mā muḥammadun illā rasūl(un), qad khalat min qablihir-rusul(u), afa'im māta au qutilanqalabtum ‘alā a‘qābikum, wa may yanqalib ‘alā ‘aqibaihi falay yaḍurrallāha syai'ā(n), wa sayajzillāhusy-syākirīn(a).
मुहम्मद तो बस एक रसूल है। उनसे पहले भी रसूल गुज़र चुके है। तो क्या यदि उनकी मृत्यु हो जाए या उनकी हत्या कर दी जाए तो तुम उल्टे पाँव फिर जाओगे? जो कोई उल्टे पाँव फिरेगा, वह अल्लाह का कुछ नहीं बिगाडेगा। और कृतज्ञ लोगों को अल्लाह बदला देगा
📝 टिप्पणी
122) नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) के रसूल (संदेष्टा) हैं। उनसे पहले के रसूल भी वफ़ात पा (देह त्याग) चुके हैं। इसलिए, नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) भी पिछले रसूलो की तरह वफ़ात पाएंगे। जब उहुद का युद्ध पूरे शबाब पर था, तब यह अफ़वाह फैल गई कि नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शहीद हो गए हैं। इस ख़बर ने मुसलमानों में खलबली मचा दी, जिससे कुछ लोग अबू सुफ़यान (क़ुरैश के नेता) की शरण लेने के बारे में सोचने लगे। दूसरी ओर, मुनाफ़िक़ों (कपटी लोगों) ने कहा कि अगर मुहम्मद सचमुच नबी होते, तो शहीद न होते। अतः, अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) ने मुसलमानों को सांत्वना देने और मुनाफ़िक़ों की बात का खंडन करने के लिए यह आयत नाज़िल फ़रमाई।