सूरह अल-माइदा
يَـٰٓأَهْلَ ٱلْكِتَـٰبِ قَدْ جَآءَكُمْ رَسُولُنَا يُبَيِّنُ لَكُمْ كَثِيرًا مِّمَّا كُنتُمْ تُخْفُونَ مِنَ ٱلْكِتَـٰبِ وَيَعْفُوا۟ عَن كَثِيرٍ ۚ قَدْ جَآءَكُم مِّنَ ٱللَّهِ نُورٌ وَكِتَـٰبٌ مُّبِينٌ
Yā ahlal-kitābi qad jā'akum rasūlunā yubayyinu lakum kaṡīram mimmā kuntum tukhfūna minal-kitābi wa ya‘fū ‘an kaṡīr(in), qad jā'akum minallāhi nūruw wa kitābum mubīn(un).
ऐ किताबवालों! हमारा रसूल तुम्हारे पास आ गया है। किताब की जो बातें तुम छिपाते थे, उसमें से बहुत-सी बातें वह तुम्हारे सामने खोल रहा है और बहुत-सी बातों को छोड़ देता है। तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से प्रकाश और एक स्पष्ट किताब आ गई है,
📝 टिप्पणी
207) अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) की ओर से "प्रकाश" (नूर) से तात्पर्य नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से है, जबकि "स्पष्ट किताब" से तात्पर्य पवित्र क़ुरआन से है।