सूरह अल-माइदा
وَلْيَحْكُمْ أَهْلُ ٱلْإِنجِيلِ بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فِيهِ ۚ وَمَن لَّمْ يَحْكُم بِمَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلْفَـٰسِقُونَ
Walyaḥkum ahlul-injīli bimā anzalallāhu fīh(i), wa mal lam yaḥkum bimā anzalallāhu fa ulā'ika humul-fasiqūn(a).
अतः इनजील वालों को चाहिए कि उस विधान के अनुसार फ़ैसला करें, जो अल्लाह ने उस इनजील में उतारा है। और जो उसके अनुसार फ़ैसला न करें, जो अल्लाह ने उतारा है, तो ऐसे ही लोग उल्लंघनकारी है
📝 टिप्पणी
214) यह नियम तब तक प्रभावी रहा जब तक अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) ने नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को रसूल बनाकर नहीं भेजा।
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