सूरह अल-माइदा
أُحِلَّ لَكُمْ صَيْدُ ٱلْبَحْرِ وَطَعَامُهُۥ مَتَـٰعًا لَّكُمْ وَلِلسَّيَّارَةِ ۖ وَحُرِّمَ عَلَيْكُمْ صَيْدُ ٱلْبَرِّ مَا دُمْتُمْ حُرُمًا ۗ وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ ٱلَّذِىٓ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
Uḥilla lakum ṣaidul-baḥri wa ṭa‘āmuhū matā‘al lakum wa lis-sayyārah(ti), wa ḥurrima ‘alaikum ṣaidul-barri mā dumtum ḥurumā(n), wattaqullāhal-lażī ilaihi tuḥsyarūn(a).
तुम्हारे लिए जल की शिकार और उसका खाना हलाल है कि तुम उससे फ़ायदा उठाओ और मुसाफ़िर भी। किन्तु थलीय शिकार जब तक तुम इहराम में हो, तुमपर हराम है। और अल्लाह से डरते रहो, जिसकी ओर तुम इकट्ठा होगे
📝 टिप्पणी
228) यहाँ समुद्र के अर्थ में नदियाँ, झीलें, तालाब और इसी तरह के अन्य जलाशय भी शामिल हैं।