सूरह अल-माइदा

فَبَعَثَ ٱللَّهُ غُرَابًا يَبْحَثُ فِى ٱلْأَرْضِ لِيُرِيَهُۥ كَيْفَ يُوَٰرِى سَوْءَةَ أَخِيهِ ۚ قَالَ يَـٰوَيْلَتَىٰٓ أَعَجَزْتُ أَنْ أَكُونَ مِثْلَ هَـٰذَا ٱلْغُرَابِ فَأُوَٰرِىَ سَوْءَةَ أَخِى ۖ فَأَصْبَحَ مِنَ ٱلنَّـٰدِمِينَ

Fa ba‘aṡallāhu gurābay yabḥaṡu fil-arḍi liyuriyahū kaifa yuwārī sau'ata akhīh(i), qāla yā wailatā a‘ajazta an akūna miṡla hāżal-gurābi fa uwāriya sau'ata akhī, fa aṣbaḥa minan-nādimīn(a).

तब अल्लाह ने एक कौआ भेजा जो भूमि कुरेदने लगा, ताकि उसे दिखा दे कि वह अपने भाई के शव को कैसे छिपाए। कहने लगा, "अफ़सोस मुझ पर! क्या मैं इस कौए जैसा भी न हो सका कि अपने भाई का शव छिपा देता?" फिर वह लज्जित हुआ

📝 टिप्पणी
210) अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) ने मनुष्य को पशुओं, पौधों और अन्य प्राकृतिक घटनाओं के व्यवहार का अध्ययन करके अपने जीवन को विकसित करने का ज्ञान और क्षमता सिखाई।

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