सूरह अल-माइदा

وَتَرَىٰ كَثِيرًا مِّنْهُمْ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْإِثْمِ وَٱلْعُدْوَٰنِ وَأَكْلِهِمُ ٱلسُّحْتَ ۚ لَبِئْسَ مَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ

Wa tarā kaṡīram minhum yusāri‘ūna fil-iṡmi wal-‘udwāni wa aklihimus-suḥt(a), labi'sa mā kānū ya‘malūn(a).

तुम देखते हो कि उनमें से बहुतेरे लोग हक़ मारने, ज़्यादती करने और हरामख़ोरी में बड़ी तेज़ी दिखाते है। निश्चय ही बहुत ही बुरा है, जो वे कर रहे है

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