सूरह अत-तौबा
خُذْ مِنْ أَمْوَٰلِهِمْ صَدَقَةً تُطَهِّرُهُمْ وَتُزَكِّيهِم بِهَا وَصَلِّ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّ صَلَوٰتَكَ سَكَنٌ لَّهُمْ ۗ وَٱللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
Khuż min amwālihim ṣadaqatan tuṭahhiruhum wa tuzakkīhim bihā wa ṣalli ‘alaihim, inna ṣalātaka sakanul lahum, wallāhu samī‘un ‘alīm(un).
तुम उनके माल में से दान लेकर उन्हें शुद्ध करो और उनके द्वारा उन (की आत्मा) को विकसित करो और उनके लिए दुआ करो। निस्संदेह तुम्हारी दुआ उनके लिए सर्वथा परितोष है। अल्लाह सब कुछ सुनता, जानता है
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332) ज़कात उन्हें कंजूसी और धन (माल) के प्रति अत्यधिक मोह से पवित्र करती है।
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