सूरह अत-तौबा

وَأَمَّا ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ فَزَادَتْهُمْ رِجْسًا إِلَىٰ رِجْسِهِمْ وَمَاتُوا۟ وَهُمْ كَـٰفِرُونَ

Wa ammal-lażīna fī qulūbihim maraḍun fa zādathum rijsan ilā rijsihim wa mātū wa hum kāfirūn(a).

रहे वे लोग जिनके दिलों में रोग है, उनकी गन्दगी में अभिवृद्धि करते हुए उसने उन्हें उनकी अपनी गन्दगी में और आगे बढ़ा दिया। और वे मरे तो इनकार की दशा ही में

📝 टिप्पणी
340) इस आयत में आंतरिक (आध्यात्मिक) बीमारियों में कुफ़्र (अविश्वास), पाखंड (मुनाफ़िक़त), संदेह और इसी तरह की अन्य चीज़ें शामिल हैं।

सभी आयत 129 आयत
आज ही पढ़ना शुरू करें

क़ुरआन पढ़ना अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। क़ुरआन टुडे आपको विकर्षणों के बिना पढ़ना जारी रखने में मदद करता है, एक सरल, तेज़, निजी और आरामदायक अनुभव के साथ।