सूरह अत-तौबा
وَمَا كَانَ ٱللَّهُ لِيُضِلَّ قَوْمًۢا بَعْدَ إِذْ هَدَىٰهُمْ حَتَّىٰ يُبَيِّنَ لَهُم مَّا يَتَّقُونَ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ بِكُلِّ شَىْءٍ عَلِيمٌ
Wa mā kānallāhu liyuḍilla qaumam ba‘da iż hadāhum ḥattā yubayyina lahum mā yattaqūn(a), innallāha bikulli syai'in ‘alīm(un).
अल्लाह ऐसा नहीं कि लोगों को पथभ्रष्ट ठहराए, जबकि वह उनको राह पर ला चुका हो, जब तक कि उन्हें साफ़-साफ़ वे बातें बता न दे, जिनसे उन्हें बचना है। निस्संदेह अल्लाह हर चीज़ को भली-भाँति जानता है
📝 टिप्पणी
337) किसी बंदे को अल्लाह तआला केवल उसके भटकाव के कारण दंडित नहीं करेगा, जब तक कि वह बंदा उन आदेशों का उल्लंघन न करे जो उसे स्पष्ट रूप से समझा दिए गए हैं।