सूरह अत-तौबा
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ قَـٰتِلُوا۟ ٱلَّذِينَ يَلُونَكُم مِّنَ ٱلْكُفَّارِ وَلْيَجِدُوا۟ فِيكُمْ غِلْظَةً ۚ وَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّ ٱللَّهَ مَعَ ٱلْمُتَّقِينَ
Yā ayyuhal-lażīna āmanū qātilul-lażīna yalūnakum minal-kuffāri wal-yajidū fīkum gilẓah(tan), wa‘lamū annallāha ma‘al-muttaqīn(a).
ऐ ईमान लानेवालो! उन इनकार करनेवालों से लड़ो जो तुम्हारे निकट है और चाहिए कि वे तुममें सख़्ती पाएँ, और जान रखो कि अल्लाह डर रखनेवालों के साथ है
📝 टिप्पणी
339) इस्लाम मुसलमानों को काफ़िरوں (अविश्वासियों) से केवल उनके कुफ़्र (अविश्वास) के कारण युद्ध करने की शिक्षा नहीं देता। युद्ध की अनुमति केवल हर प्रकार के अत्याचार को रोकने के लिए (आत्मरक्षा के रूप में) दी गई है, जैसे कि जब मुसलमानों पर हमला किया जाए।