सूरह अल-क़सस

فَلَمَّآ أَتَىٰهَا نُودِىَ مِن شَـٰطِئِ ٱلْوَادِ ٱلْأَيْمَنِ فِى ٱلْبُقْعَةِ ٱلْمُبَـٰرَكَةِ مِنَ ٱلشَّجَرَةِ أَن يَـٰمُوسَىٰٓ إِنِّىٓ أَنَا ٱللَّهُ رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ

Falammā atāhā nūdiya min syāṭi'il wādil aimani fil buq‘atil mubārakati minasy syajarati ay yā mūsā innī anallāhu rabbul-‘ālamīn(a).

फिर जब वह वहाँ पहुँचा तो दाहिनी घाटी के किनारे से शुभ क्षेत्र में वृक्ष से आवाज़ आई, "ऐ मूसा! मैं ही अल्लाह हूँ, सारे संसार का रब!"

📝 टिप्पणी
562) उसी स्थान और उसी क्षण नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) को रसूल (संदेशवाहक) के पद पर नियुक्त किया गया था।

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