सूरह अल-क़सस
وَأَنْ أَلْقِ عَصَاكَ ۖ فَلَمَّا رَءَاهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنٌّ وَلَّىٰ مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَـٰمُوسَىٰٓ أَقْبِلْ وَلَا تَخَفْ ۖ إِنَّكَ مِنَ ٱلْـَٔامِنِينَ
Wa alqi ‘aṣāk(a), falammā ra'āhā tahtazzu ka'annahā jānnuw wallā mudbiraw wa lam yu‘aqqib, yā mūsā aqbil wa lā takhaf, innaka minal-āminīn(a).
और यह कि "डाल दे अपनी लाठी।" फिर जब उसने देखा कि वह बल खा रही है जैसे कोई साँप हो तो वह पीठ फेरकर भागा और पीछे मुड़कर भी न देखा। "ऐ मूसा! आगे आ और भय न कर। निस्संदेह तेरे लिए कोई भय की बात नहीं
📝 टिप्पणी
563) इसी प्रकार का वृत्तांत (क़िस्सा) सूरह ता-हा (Ṭāhā/20: 20) में भी पाया जाता है।