सूरह अल-क़सस

وَنَزَعْنَا مِن كُلِّ أُمَّةٍ شَهِيدًا فَقُلْنَا هَاتُوا۟ بُرْهَـٰنَكُمْ فَعَلِمُوٓا۟ أَنَّ ٱلْحَقَّ لِلَّهِ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَفْتَرُونَ

Wa naza‘nā min kulli ummatin syahīdan faqulnā hātū burhānakum fa‘alimū annal-ḥaqqa lillāhi wa ḍalla ‘anhum mā kānū yaftarūn(a).

और हम प्रत्येक समुदाय में से एक गवाह निकाल लाएँगे और कहेंगे, "लाओ अपना प्रमाण।" तब वे जान लेंगे कि सत्य अल्लाह की ओर से है और जो कुछ वे घड़ते थे, वह सब उनसे गुम होकर रह जाएगा

📝 टिप्पणी
567) इस आयत में "गवाह" (साक्षी) से तात्पर्य उस रसूल (संदेशवाहक) से है जो दुनिया में उनकी ओर भेजा गया था।

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