सूरह अल-क़सस

فَعَمِيَتْ عَلَيْهِمُ ٱلْأَنۢبَآءُ يَوْمَئِذٍ فَهُمْ لَا يَتَسَآءَلُونَ

Fa ‘amiyat ‘alaihimul-ambā'u yauma'iżin fahum lā yatasā'alūn(a).

उस दिन उन्हें बात न सूझेंगी, फिर वे आपस में भी पूछताछ न करेंगे

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