सूरह अल-क़सस

وَأَصْبَحَ فُؤَادُ أُمِّ مُوسَىٰ فَـٰرِغًا ۖ إِن كَادَتْ لَتُبْدِى بِهِۦ لَوْلَآ أَن رَّبَطْنَا عَلَىٰ قَلْبِهَا لِتَكُونَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ

Wa aṣbaḥa fu'ādu ummi mūsā fārigā(n), in kādat latubdī bihī lau lā ar rabaṭnā ‘alā qalbihā litakūna minal-mu'minīn(a).

और मूसा की माँ का हृदय विचलित हो गया। निकट था कि वह उसको प्रकट कर देती, यदि हम उसके दिल को इस ध्येय से न सँभालते कि वह मोमिनों में से हो

📝 टिप्पणी
558) जब नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) की माता ने शिशु मूसा को नील नदी में प्रवाहित कर दिया, तो वे अत्यंत दुखी हुईं और उन्हें चिंता सताने लगी कि उनका बच्चा सुरक्षित नहीं रहेगा। वे दूसरों को पुकारकर अपने बच्चे को वापस लाने के लिए सहायता मांगने ही वाली थीं, जिससे यह रहस्य प्रकट हो सकता था कि मूसा उन्हीं के पुत्र हैं।

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