सूरह अल-क़सस

وَإِذَا سَمِعُوا۟ ٱللَّغْوَ أَعْرَضُوا۟ عَنْهُ وَقَالُوا۟ لَنَآ أَعْمَـٰلُنَا وَلَكُمْ أَعْمَـٰلُكُمْ سَلَـٰمٌ عَلَيْكُمْ لَا نَبْتَغِى ٱلْجَـٰهِلِينَ

Wa iżā sami‘ul-lagwa a‘raḍū ‘anhu wa qālū lanā a‘mālunā wa lakum a‘mālukum, salāmun ‘alaikum, lā nabtagil-jāhilīn(a).

और जब वे व्यर्थ की बात सुनते है तो यह कहते हुए उससे किनारा खींच लेते है कि "हमारे लिए हमारे कर्म है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म है। तुमको सलाम है! ज़ाहिलों को हम नहीं चाहते।"

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