सूरह अल-क़सस

أَفَمَن وَعَدْنَـٰهُ وَعْدًا حَسَنًا فَهُوَ لَـٰقِيهِ كَمَن مَّتَّعْنَـٰهُ مَتَـٰعَ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ثُمَّ هُوَ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ

Afamaw wa‘adnāhu wa‘dan ḥasanan fahuwa lāqīhi kamam matta‘nāhu matā‘al-ḥayātid-dun-yā ṡumma huwa yaumal-qiyāmati minal-muḥḍarīn(a).

भला वह व्यक्ति जिससे हमने अच्छा वादा किया है और वह उसे पानेवाला भी हो, वह उस व्यक्ति की तरह हो सकता है जिसे हमने सांसारिक जीवन की सामग्री दे दी हो, फिर वह क़ियामत के दिन पकड़कर पेश किया जानेवाला हो?

📝 टिप्पणी
566) ये वे लोग हैं जिन्हें सांसारिक सुख-सुविधाएं (दुनियावी नेमतें) तो दी गईं, परंतु उन्होंने उनका उपयोग आख़िरत (परलोक) का सुख पाने के लिए नहीं किया। आख़िरत में उन्हें घसीटकर नरक (जहन्नम) में डाल दिया जाएगा।

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