सूरह अल-क़सस

تِلْكَ ٱلدَّارُ ٱلْـَٔاخِرَةُ نَجْعَلُهَا لِلَّذِينَ لَا يُرِيدُونَ عُلُوًّا فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا فَسَادًا ۚ وَٱلْعَـٰقِبَةُ لِلْمُتَّقِينَ

Tilkad-dārul-ākhiratu naj‘aluhā lil-lażīna lā yurīdūna ‘uluwwan fil-arḍi wa lā fasādā(n), wal-‘āqibatu lil-muttaqīn(a).

आख़िरत का घर हम उन लोगों के लिए ख़ास कर देंगे जो न धरती में अपनी बड़ाई चाहते है और न बिगाड़। परिणाम तो अन्ततः डर रखनेवालों के पक्ष में है

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