सूरह अल-क़सस
وَكَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍۭ بَطِرَتْ مَعِيشَتَهَا ۖ فَتِلْكَ مَسَـٰكِنُهُمْ لَمْ تُسْكَن مِّنۢ بَعْدِهِمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ وَكُنَّا نَحْنُ ٱلْوَٰرِثِينَ
Wa kam ahlaknā min qaryatim baṭirat ma‘īsyatahā, fatilka masākinuhum lam tuskam mim ba‘dihim illā qalīlā(n), wa kunnā naḥnul-wāriṡīn(a).
हमने कितनी ही बस्तियों को विनष्ट कर डाला, जिन्होंने अपनी गुज़र-बसर के संसाधन पर इतराते हुए अकृतज्ञता दिखाई। तो वे है उनके घर, जो उनके बाद आबाद थोड़े ही हुए। अन्ततः हम ही वारिस हुए
📝 टिप्पणी
565) उसके निवासियों के विनाश के बाद, वह स्थान उजाड़ हो गया और फिर कभी आबाद नहीं किया गया, यहाँ तक कि अंततः वह अपने वास्तविक स्वामी, अल्लाह सुब्हानहू व तआला के पास वापस आ गया।