सूरह अज़-ज़ुमर
أَفَمَنْ حَقَّ عَلَيْهِ كَلِمَةُ ٱلْعَذَابِ أَفَأَنتَ تُنقِذُ مَن فِى ٱلنَّارِ
Afaman ḥaqqa ‘alaihi kalimatul-‘ażāb(i), afa'anta tunqiżu man fin-nār(i).
तो क्या वह व्यक्ति जिसपर यातना की बात सत्यापित हो चुकी है (यातना से बच सकता है)? तो क्या तुम छुड़ा लोगे उसको जो आग में है
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