सूरह अज़-ज़ुमर

وَأَشْرَقَتِ ٱلْأَرْضُ بِنُورِ رَبِّهَا وَوُضِعَ ٱلْكِتَـٰبُ وَجِا۟ىٓءَ بِٱلنَّبِيِّـۧنَ وَٱلشُّهَدَآءِ وَقُضِىَ بَيْنَهُم بِٱلْحَقِّ وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ

Wa asyraqatil-arḍu binūri rabbihā wa wuḍi‘al-kitābu wa jī'a bin-nabiyyīna wasy-syuhadā'i wa quḍiya bainahum bil-ḥaqqi wa hum lā yuẓlamūn(a).

और धरती रब के प्रकाश से जगमगा उठेगी, और किताब रखी जाएगी और नबियों और गवाहों को लाया जाएगा और लोगों के बीच हक़ के साथ फ़ैसला कर दिया जाएगा, और उनपर कोई ज़ुल्म न होगा

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