सूरह अज़-ज़ुमर
وَوُفِّيَتْ كُلُّ نَفْسٍ مَّا عَمِلَتْ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَا يَفْعَلُونَ
Wa wuffiyat kullu nafsim mā ‘amilat wa huwa a‘lamu bimā yaf‘alūn(a).
और प्रत्येक व्यक्ति को उसका किया भरपूर दिया जाएगा। और वह भली-भाँति जानता है, जो कुछ वे करते है
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