सूरह अज़-ज़ुमर

أَفَمَن يَتَّقِى بِوَجْهِهِۦ سُوٓءَ ٱلْعَذَابِ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ وَقِيلَ لِلظَّـٰلِمِينَ ذُوقُوا۟ مَا كُنتُمْ تَكْسِبُونَ

Afamay yattaqī biwajhihī sū'al-‘ażābi yaumal-qiyāmah(ti), wa qīla liẓ-ẓālimīna żūqū mā kuntum taksibūn(a).

अब क्या जो क़ियामत के दिन अपने चहरें को बुरी यातना (से बचने) की ढाल बनाएगा वह (यातना से सुरक्षित लोगों जैसा होगा)? और ज़ालिमों से कहा जाएगा, "चखों मज़ा उस कमाई का, जो तुम करते रहे थे!"

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