सूरह अज़-ज़ुमर
كَذَّبَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَأَتَىٰهُمُ ٱلْعَذَابُ مِنْ حَيْثُ لَا يَشْعُرُونَ
Każżabal-lażīna min qablihim fa'atāhumul-‘ażābu mi ḥaiṡu lā yasy‘urūn(a).
जो लोग उनसे पहले थे उन्होंने भी झूठलाया। अन्ततः उनपर वहाँ से यातना आ पहुँची, जिसका उन्हें कोई पता न था
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