सूरह अल-मुमिनून

لَعَلِّىٓ أَعْمَلُ صَـٰلِحًا فِيمَا تَرَكْتُ ۚ كَلَّآ ۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَآئِلُهَا ۖ وَمِن وَرَآئِهِم بَرْزَخٌ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ

La‘allī a‘malu ṣāliḥan fīmā taraktu kallā, innahā kalimatun huwa qā'iluhā, wa miw warā'ihim barzakhun ilā yaumi yub‘aṡūn(a).

उसमें अच्छा कर्म करूँ।" कुछ नहीं, यह तो बस एक (व्यर्थ) बात है जो वह कहेगा और उनके पीछे से लेकर उस दिन तक एक रोक लगी हुई है, जब वे दोबारा उठाए जाएँगे

📝 टिप्पणी
513) बरज़ख़ से तात्पर्य उस स्थान या स्थिति से है जिसमें मनुष्य मृत्यु के बाद से लेकर क़ियामत के दिन दोबारा उठाए जाने तक रहता है।

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