सूरह अल-मुमिनून

إِنْ هِىَ إِلَّا حَيَاتُنَا ٱلدُّنْيَا نَمُوتُ وَنَحْيَا وَمَا نَحْنُ بِمَبْعُوثِينَ

In hiya illā ḥayātunad-dun-yā namūtu wa naḥyā wa mā naḥnu bimab‘ūṡīn(a).

वह तो बस हमारा सांसारिक जीवन ही है। (यहीं) हम मरते और जीते है। हम कोई दोबारा उठाए जानेवाले नहीं है

📝 टिप्पणी
507) कुछ मनुष्य मृत्यु को प्राप्त होते हैं और कुछ अन्य जन्म लेते हैं।

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