सूरह अल-मुमिनून

حَتَّىٰٓ إِذَا فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا ذَا عَذَابٍ شَدِيدٍ إِذَا هُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ

Ḥattā iżā fataḥnā ‘alaihim bāban żā ‘ażābin syadīdin iżā hum fīhi mublisūn(a).

यहाँ तक कि जब हम उनपर कठोर यातना का द्वार खोल दें तो क्या देखेंगे कि वे उसमें निराश होकर रह गए है

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