सूरह अल-मुमिनून

إِنْ هُوَ إِلَّا رَجُلٌ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا وَمَا نَحْنُ لَهُۥ بِمُؤْمِنِينَ

In huwa illā rajuluniftarā ‘alallāhi każibaw wa mā naḥnu lahū bimu'minīn(a).

वह तो बस एक ऐसा व्यक्ति है जिसने अल्लाह पर झूठ घड़ा है। हम उसे कदापि माननेवाले नहीं।"

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