सूरह अल-मुमिनून

نُسَارِعُ لَهُمْ فِى ٱلْخَيْرَٰتِ ۚ بَل لَّا يَشْعُرُونَ

Nusāri‘u lahum fil-khairāt(i), bal lā yasy‘urūn(a).

तो यह उनके भलाइयों में कोई जल्दी कर रहे है?

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