सूरह अल-मुमिनून

ثُمَّ خَلَقْنَا ٱلنُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا ٱلْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا ٱلْمُضْغَةَ عِظَـٰمًا فَكَسَوْنَا ٱلْعِظَـٰمَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَـٰهُ خَلْقًا ءَاخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ ٱللَّهُ أَحْسَنُ ٱلْخَـٰلِقِينَ

Ṡumma khalaqnan-nuṭfata ‘alaqatan fa khalaqnal-‘alaqata muḍgatan fa khalaqnal-muḍgata ‘iẓāman fa kasaunal-‘iẓāma laḥmā(n), ṡumma ansya'nāhu khalqan ākhar(a), fa tabārakallāhu aḥsanul-khāliqīn(a).

फिर हमने उस बूँद को लोथड़े का रूप दिया; फिर हमने उस लोथड़े को बोटी का रूप दिया; फिर हमने उन हड्डियों पर मांस चढाया; फिर हमने उसे एक दूसरा ही सर्जन रूप देकर खड़ा किया। अतः बहुत ही बरकतवाला है अल्लाह, सबसे उत्तम स्रष्टा!

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