सूरह अन-निसा
إِلَّا ٱلَّذِينَ تَابُوا۟ وَأَصْلَحُوا۟ وَٱعْتَصَمُوا۟ بِٱللَّهِ وَأَخْلَصُوا۟ دِينَهُمْ لِلَّهِ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ مَعَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ۖ وَسَوْفَ يُؤْتِ ٱللَّهُ ٱلْمُؤْمِنِينَ أَجْرًا عَظِيمًا
Illal-lażīna tābū wa aṣlaḥū wa‘taṣamū billāhi wa akhlaṣū dīnahum lillāhi fa ulā'ika ma‘al-mu'minīn(a), wa saufa yu'tillāhul mu'minīna ajran ‘aẓīmā(n).
उन लोगों की बात और है जिन्होंने तौबा कर ली और अपने को सुधार लिया और अल्लाह को मज़बूती से पकड़ लिया और अपने दीन (धर्म) में अल्लाह ही के हो रहे। ऐसे लोग ईमानवालों के साथ है और अल्लाह ईमानवालों को शीघ्र ही बड़ा प्रतिदान प्रदान करेगा
📝 टिप्पणी
176) सूरह अल-बक़रह (2:160) की पाद-टिप्पणी देखें।