सूरह अन-निसा
ٱلرِّجَالُ قَوَّٰمُونَ عَلَى ٱلنِّسَآءِ بِمَا فَضَّلَ ٱللَّهُ بَعْضَهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ وَبِمَآ أَنفَقُوا۟ مِنْ أَمْوَٰلِهِمْ ۚ فَٱلصَّـٰلِحَـٰتُ قَـٰنِتَـٰتٌ حَـٰفِظَـٰتٌ لِّلْغَيْبِ بِمَا حَفِظَ ٱللَّهُ ۚ وَٱلَّـٰتِى تَخَافُونَ نُشُوزَهُنَّ فَعِظُوهُنَّ وَٱهْجُرُوهُنَّ فِى ٱلْمَضَاجِعِ وَٱضْرِبُوهُنَّ ۖ فَإِنْ أَطَعْنَكُمْ فَلَا تَبْغُوا۟ عَلَيْهِنَّ سَبِيلًا ۗ إِنَّ ٱللَّهَ كَانَ عَلِيًّا كَبِيرًا
Ar-rijālu qawwāmūna ‘alan-nisā'i bimā faḍḍalallāhu ba‘ḍahum ‘alā ba‘ḍiw wa bimā anfaqū min amwālihim, faṣ-ṣāliḥātu qānitātun ḥāfiẓātul lil-gaibi bimā ḥafiẓallāh(u), wal-lātī takhāfūna nusyūzahunna fa ‘iẓūhunna wahjurūhunna fil-maḍāji‘i waḍribūhunn(a), fa in aṭa‘nakum falā tabgū ‘alaihinna sabīlā(n), innallāha kāna ‘aliyyan kabīrā(n).
पति पत्नियों संरक्षक और निगराँ है, क्योंकि अल्लाह ने उनमें से कुछ को कुछ के मुक़ाबले में आगे रहा है, और इसलिए भी कि पतियों ने अपने माल ख़र्च किए है, तो नेक पत्ऩियाँ तो आज्ञापालन करनेवाली होती है और गुप्त बातों की रक्षा करती है, क्योंकि अल्लाह ने उनकी रक्षा की है। और जो पत्नियों ऐसी हो जिनकी सरकशी का तुम्हें भय हो, उन्हें समझाओ और बिस्तरों में उन्हें अकेली छोड़ दो और (अति आवश्यक हो तो) उन्हें मारो भी। फिर यदि वे तुम्हारी बात मानने लगे, तो उनके विरुद्ध कोई रास्ता न ढूढ़ो। अल्लाह सबसे उच्च, सबसे बड़ा है
📝 टिप्पणी
154) परिवार के मुखिया के रूप में, पति की यह ज़िम्मेदारी है कि वह अपने परिवार की रक्षा करे, उन्हें आश्रय दे, उनकी देखरेख करे और परिवार की भलाई तथा कल्याण के लिए प्रयास करे। 155) नुशूज़ (अवज्ञा) से तात्पर्य किसी पत्नी द्वारा अपने वैवाहिक कर्तव्यों और दायित्वों को छोड़ देना है, जैसे अपने पति की अनुमति या सहमति के बिना घर से बाहर चले जाना।