सूरह अन-निसा

مَّن يُطِعِ ٱلرَّسُولَ فَقَدْ أَطَاعَ ٱللَّهَ ۖ وَمَن تَوَلَّىٰ فَمَآ أَرْسَلْنَـٰكَ عَلَيْهِمْ حَفِيظًا

May yuṭi‘ir-rasūla faqad aṭā‘allāh(a), wa man tawallā famā arsalnāka ‘alaihim ḥafīẓā(n).

जिसने रसूल की आज्ञा का पालन किया, उसने अल्लाह की आज्ञा का पालन किया और जिसने मुँह मोड़ा तो हमने तुम्हें ऐसे लोगों पर कोई रखवाला बनाकर तो नहीं भेजा है

📝 टिप्पणी
159) रसूल उनके कार्यों के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं और न ही इस बात की गारंटी देते हैं कि वे कोई ग़लती नहीं करेंगे।

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