सूरह अन-निसा
أَلَمْ تَرَ إِلَى ٱلَّذِينَ أُوتُوا۟ نَصِيبًا مِّنَ ٱلْكِتَـٰبِ يُؤْمِنُونَ بِٱلْجِبْتِ وَٱلطَّـٰغُوتِ وَيَقُولُونَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ هَـٰٓؤُلَآءِ أَهْدَىٰ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ سَبِيلًا
Alam tara ilal-lażīna ūtū naṣībam minal-kitābi yu'minūna bil-jibti waṭ-ṭāgūti wa yaqūlūna lil-lażīna kafarū hā'ulā'i ahdā minal-lażīna āmanū sabīlā(n).
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा, जिन्हें किताब का एक हिस्सा दिय् गया? वे अवास्तविक चीज़ो और ताग़ूत (बढ़ हुए सरकश) को मानते है। और अधर्मियों के विषय में कहते है, "ये ईमानवालों से बढ़कर मार्ग पर है।"
📝 टिप्पणी
158) जिब्त से तात्पर्य शैतान और उन सभी चीज़ों से है जिनकी अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) के अतिरिक्त पूजा की जाती है, जबकि ताग़ूत का शब्द आमतौर पर उस व्यक्ति के लिए उपयोग किया जाता है जिसकी बुराई और सरकशी सीमा से अधिक बढ़ जाए (देखें सूरह अल-बक़रह 2:256 की पाद-टिप्पणी)।