सूरह अन-नहल

لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ هُمُ ٱلْخَـٰسِرُونَ

Lā jarama annahum fil-ākhirati humul-khāsirūn(a).

निश्चय ही आख़िरत में वही घाटे में रहेंगे

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