सूरह अन-नहल

مَتَـٰعٌ قَلِيلٌ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ

Matā‘un qalīl(un), wa lahum ‘ażābun alīm(un).

यह उपभोग थोड़ा है, उनके लिए वास्तव में तो दुखद यातना है

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