सूरह अन-नहल

وَٱصْبِرْ وَمَا صَبْرُكَ إِلَّا بِٱللَّهِ ۚ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُ فِى ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ

Waṣbir wa mā ṣabruka illā billāhi wa lā taḥzan ‘alaihim wa lā taku fī ḍaiqim mimmā yamkurūn(a).

सब्र से काम लो - और तुम्हारा सब्र अल्लाह ही से सम्बद्ध है - और उन पर दुखी न हो और न उससे दिल तंग हो जो चालें वे चलते है

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