सूरह अन-नहल
إِنَّمَا جُعِلَ ٱلسَّبْتُ عَلَى ٱلَّذِينَ ٱخْتَلَفُوا۟ فِيهِ ۚ وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَحْكُمُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ فِيمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
Innamā ju‘ilas-sabtu ‘alal-lażīnakhtalafū fīh(i), wa inna rabbaka layaḥkumu bainahum yaumal-qiyāmati fīmā kānū fīhi yakhtalifūn(a).
'सब्त' तो केवल उन लोगों पर लागू हुआ था जिन्होंने उसके विषय में विभेद किया था। निश्चय ही तुम्हारा रब उनके बीच क़ियामत के दिन उसका फ़ैसला कर देगा, जिसमें वे विभेद करते रहे है
📝 टिप्पणी
423) यहूदियों को आदेश दिया गया था कि वे इबादत (पूजा) के लिए जुमे (शुक्रवार) का दिन विशेष रूप से निर्धारित करें, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और इसके बजाय शनीचर (शनिवार) का दिन चुन लिया।