सूरह अन-नहल
ٱلَّذِينَ تَتَوَفَّىٰهُمُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ طَيِّبِينَ ۙ يَقُولُونَ سَلَـٰمٌ عَلَيْكُمُ ٱدْخُلُوا۟ ٱلْجَنَّةَ بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
Allażīna tatawafāhumul-malā'ikatu ṭayyibīn(a), yaqūlūna salāmun ‘alaikumudkhulul-jannata bimā kuntum ta‘malūn(a).
जिनकी रूहों को फ़रिश्ते इस दशा में ग्रस्त करते है कि वे पाक और नेक होते है, वे कहते है, "तुम पर सलाम हो! प्रवेश करो जन्नत में उसके बदले में जो कुछ तुम करते रहे हो।"
📝 टिप्पणी
414) इसका तात्पर्य कुफ़्र (अविश्वास) और अवज्ञा से पवित्र अवस्था में मृत्यु होना है, या इसका यह भी अर्थ हो सकता है कि वे प्रसन्नता की स्थिति में प्राण त्यागते हैं क्योंकि फ़रिश्तों द्वारा उन्हें जन्नत (स्वर्ग) में प्रवेश करने का शुभ समाचार दिया जाता है।