सूरह अन-नहल

وَإِنْ عَاقَبْتُمْ فَعَاقِبُوا۟ بِمِثْلِ مَا عُوقِبْتُم بِهِۦ ۖ وَلَئِن صَبَرْتُمْ لَهُوَ خَيْرٌ لِّلصَّـٰبِرِينَ

Wa in ‘āqabtum fa ‘āqibū bimiṡli mā ‘ūqibtum bih(ī), wa la'in ṣabartum lahuwa khairul liṣ-ṣābirīn(a).

और यदि तुम बदला लो तो उतना ही जितना तुम्हें कष्ट पहुँचा हो, किन्तु यदि तुम सब्र करो तो निश्चय ही यह सब्र करनेवालों के लिए ज़्यादा अच्छा है

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