सूरह अन-नहल

ثُمَّ إِذَا كَشَفَ ٱلضُّرَّ عَنكُمْ إِذَا فَرِيقٌ مِّنكُم بِرَبِّهِمْ يُشْرِكُونَ

Ṡumma iżā kasyafaḍ-ḍurra ‘ankum iżā farīqum minkum birabbihim yusyrikūn(a).

फिर जब वह उस तकलीफ़ को तुमसे टाल देता है, तो क्या देखते है कि तुममें से कुछ लोग अपने रब के साथ साझीदार ठहराने लगते है,

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