सूरह अन-नहल

وَمَآ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِىٓ إِلَيْهِمْ ۚ فَسْـَٔلُوٓا۟ أَهْلَ ٱلذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ

Wa mā arsalnā min qablika illā rijālan nūḥī ilaihim fas'alū ahlaż-żikri in kuntum lā ta‘lamūn(a).

हमने तुमसे पहले भी पुरुषों ही को रसूल बनाकर भेजा था - जिनकी ओर हम प्रकाशना करते रहे है। यदि तुम नहीं जानते तो अनुस्मृतिवालों से पूछ लो

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418) अर्थात् वे लोग जिन्हें नबियों और किताबों (धर्मग्रंथों) का ज्ञान है।

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