सूरह अल-अंबिया

وَلَقَدْ كَتَبْنَا فِى ٱلزَّبُورِ مِنۢ بَعْدِ ٱلذِّكْرِ أَنَّ ٱلْأَرْضَ يَرِثُهَا عِبَادِىَ ٱلصَّـٰلِحُونَ

Wa laqad katabnā fiz-zabūri mim ba‘diż-żikri annal-arḍa yariṡuhā ‘ibādiyaṣ-ṣāliḥūn(a).

और हम ज़बूर में याददिहानी के पश्चात लिए चुके है कि "धरती के वारिस मेरे अच्छे बन्दें होंगे।"

📝 टिप्पणी
496) कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याकारों) का कहना है कि ज़बूर वह किताब है जो नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) पर नाज़िल हुई थी, जबकि अज़-ज़िक्र से मुराद तौरात है। दूसरों के अनुसार, ज़बूर से मुराद वे तमाम किताबें हैं जो अल्लाह सुब्हानहू व तआला ने नबियों पर नाज़िल फ़रमाईं, लौहे महफ़ूज़ में लिखे जाने के बाद।

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