सूरह अल-अंबिया
بَلْ نَقْذِفُ بِٱلْحَقِّ عَلَى ٱلْبَـٰطِلِ فَيَدْمَغُهُۥ فَإِذَا هُوَ زَاهِقٌ ۚ وَلَكُمُ ٱلْوَيْلُ مِمَّا تَصِفُونَ
Bal naqżifu bil-ḥaqqi ‘alal-bāṭili fa yadmaguhū fa iżā huwa zāhiq(un), wa lakumul-wailu mimmā taṣifūn(a).
नहीं, बल्कि हम तो असत्य पर सत्य की चोट लगाते है, तो वह उसका सिर तोड़ देता है। फिर क्या देखते है कि वह मिटकर रह जाता है और तुम्हारे लिए तबाही है उन बातों के कारण जो तुम बनाते हो!
📝 टिप्पणी
490) अनुचित आरोपण (गुण बताने) का एक उदाहरण यह धारणा है कि अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) की पत्नी और संतान हैं।
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