सूरह अल-अंबिया
وَزَكَرِيَّآ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُۥ رَبِّ لَا تَذَرْنِى فَرْدًا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلْوَٰرِثِينَ
Wa zakariyyā iż nādā rabbahū rabbi lā tażarnī fardaw wa anta khairul-wāriṡīn(a).
और ज़करिया पर भी कृपा की। याद करो जबकि उसने अपने रब को पुकारा, "ऐ मेरे रब! मुझे अकेला न छोड़ यूँ, सबसे अच्छा वारिस तो तू ही है।"
📝 टिप्पणी
494) यदि अल्लाह (सुब्हानहू व तआला) उनकी दुआ स्वीकार न करता—अर्थात् उन्हें संतान न देता—तो हज़रत ज़करिया (अलयहिस्सलाम) अल्लाह के सामने पूरी तरह आत्मसमर्पण (सब्र) कर लेते, क्योंकि अल्लाह ही सबसे उत्तम वारिस (उत्तराधिकारी) है।
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