सूरह अल-अंबिया
وَحَرَٰمٌ عَلَىٰ قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَـٰهَآ أَنَّهُمْ لَا يَرْجِعُونَ
Wa ḥarāmun ‘alā qaryatin ahlaknāhā, innahum lā yarji‘ūn(a).
और किसी बस्ती के लिए असम्भव है जिसे हमने विनष्ट कर दिया कि उसके लोग (क़ियामत के दिन दंड पाने हेतु) न लौटें
📝 टिप्पणी
495) कुछ मुफ़स्सिरों (व्याख्याकारों) के अनुसार, इस आयत का यह अर्थ भी हो सकता है, 'यह असंभव है कि किसी ऐसी बस्ती के (लोग), जिसे हमने नष्ट कर दिया हो, वे (परलोक में हिसाब के लिए हमारे पास) वापस न आएं'।
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