सूरह अल-अंबिया

وَعَلَّمْنَـٰهُ صَنْعَةَ لَبُوسٍ لَّكُمْ لِتُحْصِنَكُم مِّنۢ بَأْسِكُمْ ۖ فَهَلْ أَنتُمْ شَـٰكِرُونَ

Wa ‘allamnāhu ṣan‘ata labūsil lakum lituḥṣinakum mim ba'sikum, fahal antum syākirūn(a).

और हमने उसे तुम्हारे लिए एक परिधान (बनाने) की शिल्प-कला भी सिखाई थी, ताकि युद्ध में वह तुम्हारी रक्षा करे। फिर क्या तुम आभार मानते हो?

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